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27 Nakshatra in Hindi with astrology analysis

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nakshatra in hindi

आज के इस लेख के माध्यम से हम आपके साथ 27 Nakshatra in hindi की इनफार्मेशन को शेयर करेंगे| इसमे हम आपसे नक्षत्र कौन से है और उन नक्षत्र के देवता, रूलिंग प्लेनेट आदि को विस्तार से बताएँगे जिसे आपको समजने में आसानी हो| सबसे पहले क्या है Nakshatra in hindi पर बात करते है|

Nakshatra क्या है(What is Star)

“एक या एक से अधिक तारा/सितारों मिलकर के समूह बनाते है जिसे नक्षत्र कहा जाता है|” हिन्दू शास्त्रों में और पंचांग से शुभ मुहूर्त निकालने में नक्षत्र का महत्वपूर्ण योगदान है| एक राशी की लम्बाई जैसे 30 डिग्री की होती है वेसे भी नक्षत्र की भी लम्बाई 13.20 डीग्री होती है| हिन्दू शास्त्रों के अनुसार कुल 27 नक्षत्र है| उन सभी 27 nakshtra names in Hindi कुछ इस प्रकार है|

List of 27 Nakshatra (27 Nakshatra names in Hindi)

यहाँ पर हम सभी नक्षत्र के नाम दे रहे है वह क्रम में है और मेष राशी से शुरू होकर मीन राशी में क्रमानुसार स्थित है|

27 Nakshatra names in Hindi (List of Nakshatra in Hindi)

  1. अश्विनी
  2. भरणी
  3. कृतिका
  4. रोहिणी
  5. मृगशिरा
  6. आर्द्रा
  7. पुनर्वसु
  8. पुष्य
  9. अश्लेषा
  10. मघा
  11. पूर्वाफाल्गुनी
  12. उत्तराफाल्गुनी
  13. हस्त
  14. चित्रा
  15. स्वाति
  16. विशाखा
  17. अनुराधा
  18. ज्येष्ठ
  19. मूल / मूला
  20. पूर्वाषाढ़ा
  21. उत्तराषाढ़ा
  22. श्रवण
  23. धनिष्ठा
  24. शतभिषा
  25. पूर्वाभाद्रपद
  26. उत्तराभाद्रपद
  27. रेवती

जन्म पत्रिका में कोनसा नक्षत्र महत्वपूर्ण है ?

वेसे तो सभी नक्षत्र जन्मपत्रिका में काफी महत्वपूर्ण है लेकिन उसमे भी जिस नक्षत्र में प्लेनेट(ग्रह) बैठे हो वह काफी महत्वपूर्ण हो जाते है| चन्द्र जन्म पत्रिका में जिस भी नक्षत्र में बेठा है वह नक्षत्र ज्योतिष में और जन्म पत्रिका में सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है|

चन्द्र जिस भी नक्षत्र में बैठा हो उस नक्षत्र के हिसाब से व्यक्ति का स्वाभाव और गुण बनते है| चन्द्रमा अच्छे नक्षत्र में हो तो जातक को उसका शुभ फल प्राप्त होता है लेकिन अगर गंडमूल जैसे नक्षत्र में होने पर अधिक तकलीफों का सामना करना पड़ता है|

नक्षत्र का वर्गीकरण

नक्षत्र का वर्गीकरण दो प्रकार से किया जाता है| 1. शुभता-अशुभता के आधार पर नक्षत्र का वर्गीकरण, 2. लोचन के आधार पर वर्गीकरण|

शुभता-अशुभता के आधार पर नक्षत्र का वर्गीकरण

सबसे पहले हम |शुभता-अशुभता के आधार पर नक्षत्र का वर्गीकरण देखते है| इसमे नक्षत्र से मिलाने वाले फल के अनुसार इन्हें तिन हिस्सों में विभाजित किया गया है|

  • शुभ नक्षत्र
  • मध्यम नक्षत्र
  • अशुभ नक्षत्र

शुभ नक्षत्र: शुभ नक्षत्र में इस तरह के नक्षत्र समाहित होते है जो की अच्छे गुण और तत्व वाले हो उनका स्वामी कोई शुभ ग्रह बन रहा हो| शुभ नक्षत्र की खास बात यह है की उनमे किये गए कार्य आसानी से लाभ देते है| शुभ नक्षत्रो के उदहारण देखे तो, रोहिणी, अश्विन, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, चित्रा, रेवती, श्रवण, स्वाति, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद, उत्तराषाढा, उत्तरा फाल्गुनी, घनिष्ठा, पुनर्वसु सभी शुभ नक्षत्रो में गिने जाते है| ये सभी उसी प्रकार के नक्षत्र है जिसमे कार्य की सफल होने की संभावना अधिक होती है|

अशुभ नक्षत्र: अशुभ नक्षत्र के गुण और तत्व अच्छे और लाभकारी नहीं होते है|ज्योतिष में पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, पूर्वाभाद्रपद, विशाखा, ज्येष्ठा, आर्द्रा, मूला और शतभिषा को अशुभ नक्षत्र माना गया है क्योंकि इन नक्षत्र में किये गए कार्य अच्छे से सफल नहीं हो सकते है|

मध्यम नक्षत्र: भरणी, कृतिका, मघा और आश्लेषा को माध्यम नक्षत्र माना जाता है| कुछ विशेष कार्य करने के लिए इसे नक्षत्र का प्रयोग किया जाता है| इस नक्षत्र में शुभ नहीं कए जाते|

लोचन नक्षत्र” के आधार पर वर्गीकरण

नक्षत्र को लोचन के आधार पर भी चार हिस्सों में वर्गीकृत किया जाता है| नक्षत्र का यह हिस्सा सबसे अधिक प्रश्नकुण्डलीं में उपयोग होता है| जब भी कोई चीज-वस्तु गुम हो जाती है और उस विषय में प्रश्न आये की यह वस्तु मिलेगी की नहीं तब नक्षत्र लोचन ज्योतिष में सबसे अधिक मदद करता है| यहाँ पर सिर्फ हम आपको नक्षत्र लोचन के बारे में ही इनफार्मेशन देंगे वह वास्तु मिलेगी कब और किस दिशा में मिलेंगी उस विषय में हम आपको बाद में इनफार्मेशन देंगे|

मंद लोचन नक्षत्र: इसमे अश्विनी, मृगशिरा, आश्लेषा, हस्त, अनुराधा, उत्तरषाढा, शतभिषा नक्षत्र मंद लोचन नक्षत्र के उदाहरण है|

मध्य लोचन नक्षत्र: भरणी, आर्द्रा, मघा, चित्रा, ज्येष्ठा, अभिजित, पूर्वाभाद्रपद मध्य लोचन नक्षत्र के उदहारण है|

सुलोचन नक्षत्र: कृतिका, पुनर्वसू, पूर्वफाल्गुनी, स्वाति, मूला, श्रवण, उत्तरभाद्रपद सुलोचन नक्षत्र के उदहारण है|

अंध लोचन नक्षत्र: रेवती, रोहिणी, पुष्य, उत्तरफाल्गुनी, विशाखा, पूर्वाषाढा, धनिष्ठा अंधलोचन नक्षत्र के उदहारण है|

Detailed Analysis of Nakshatra in Hindi

नक्षत्रो को अच्छे से जानने के लिए उसके सभी गुण, तत्त्व, नक्षत्र के स्वामी, नक्षत्रपद के स्वामी सभी की इनफार्मेशन जननी अवश्यक है|

अश्विनी नक्षत्र (Ashwini Nakshatra in Hindi)

अश्विनी नक्षत्र तिन तारों के समूह से मिलकर बना है| इसकी आकृति “अश्वमुख” की भाँती प्रतीत होती है| उत्तर पूर्व का अल्फा तारा हमल तारा है परन्तु अश्विन नक्षत्र का प्रमुख योगतारा मध्य का तारा है| प्राचीन काल में मध्य और अंतिम तारो को “अश्वयुज” नाम से पहचाना जाता था|

Basic information of Ashwini Nakshatra in Hindi

  • स्वामी ग्रह केतु है।
  • अश्विन नक्षत्र पर अश्विनीकुमार का अधिकार है|
  • यह नक्षत्र चक्र का पहला नक्षत्र है
  • इस नक्षत्र में तारों की संख्या तिन है|
  • यह नक्षत्र मेष राशी में स्थित है|

भरणी नक्षत्र (Bharani Nakshatra in Hindi)

भरणी नक्षत्र भी तिन तारो के समूह के द्वारा बना हुआ है| कुछ विद्वान् इसकी आकृति भग(योनी) जैसी मानते है तो कुछ विद्वानों के द्वारा इसकी आकृति को मक्षिका जैसी मानी जाती है| यह तीनो सितारों के माध्यम से त्रिभुज जैसी आकृति बनती है|

Basic information of Bharani Nakshatra in Hindi

  • इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र है|
  • भरणी नक्षत्र के स्वामी देवता यम हैं।
  • यह तिन तारों के द्वारा बना है|
  • यह नक्षत्र चक्र में दूसरा नक्षत्र है|
  • यह नक्षत्र मेष राशी में स्थित है|

कृतिका नक्षत्र (Kritika Nakshatra in Hindi)

कृतिका नक्षत्र का किसान सबसे अधिक उपयोग करते है| रात्री के दरमियाँ समय को जानने के लिए इस नक्षत्र का प्रयोग किया जाता है| इसे आम भाषा में “कचरिया या कचर पचर का झुमका ” से पहचानते है| विद्वान लोगो का मत है की कृतिका नक्षत्र की आकृति छुरे जैसी है| अब कुछ ख़ास Kritika Nakshatra in Hindi में जानते है|

Basic information of Kritika Nakshatra in Hindi

  • कृतिका नक्षत्र का स्वामी ग्रह सूर्य है
  • अग्नी इस नक्षत्र के देवता हैं।
  • यह सात ताराओ का समूह है|
  • यह अंगुरे के गुच्छा जैसा प्रतीत होता है|
  • इसका प्रथम चरण मेष राशी में और बाकी के तिन नक्षत्र वृष राशी में होते है|
  • यह नक्षत्र चक्र का तीसरा नक्षत्र है|

रोहिणी नक्षत्र (Rohini Nakshatra in Hindi)

रोहिणी नक्षत्र की आकृति एक रथ के सामान होती है| रोहिणी नक्षत्र के साथ अन्य अश्विनी, भरणी, कृतिका नक्षत्र को मिला दिया जाये तो इससे एक अर्धचन्द्र की आकृति बनती है| रोहिणी के तारो की गिनती आकाश में दृष्ट तारो में से सबसे अधिक प्रकाशमान 20 तारो में होती है| यह चन्द्र को सबसे अधिक प्रिय रानी भी रोहिणी को ही माना जाता है जिसकी वजह से उन्हें श्राप भी मिला था|

Basic information of Rohini Nakshatra in Hindi

  • रोहिणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह चंद्रमा है।
  • ब्रह्मा इस नक्षत्र के देवता हैं।
  • पांच तारों का समूह मिलकर इस नक्षत्र को बनाता है|
  • पांच तारों के कारण आकृति एक रथ के जैसी लगती है|
  • यह सम्पूर्ण नक्षत्र वृष राशी में स्थित है|
  • यह नक्षत्र चक्र का चौथा नक्षत्र है|

मृगशिरा नक्षत्र (Mrigshira Nakshatra in Hindi)

यह मृग मंडल के सबसे उपरी भाग में दिखने वाला एवम अपने तारो से त्रिभुज की आकृति बनाने वाला नक्षत्र है| यह नक्षत्र में तिन तारें होते है| यह नक्षत्र के दो चरण वरिश राशी में होते है तो अन्य दो चरण मिथुन राशी में होते है| यह नक्षत्र चक्र का पांचवा नक्षत्र है|

  • मंगल मृगशिरा नक्षत्र स्वामी ग्रह है
  • चंद्रमा का अधिकार है इस नक्षत्र पर|

आर्द्रा नक्षत्र (Ardra Nakshatra in Hindi)

यह एकल तारा नक्षत्र है अर्थात इस नक्षत्र में सिर्फ एक ही सितारा है| यह उन 20 सितारों में शामिल होता है जो आकाश मंडल में सर्वाधिक चमकीले तारे है| यह सम्पूर्ण नक्षत्र मिथुन राशी में समाहित होता है| सूर्य 21 जून से आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करता है| यह नक्षत्र चक्र का छठा नक्षत्र है|

  • आर्द्रानक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु है।
  • आर्द्रानक्षत्रदेवता शिव हैं।

पुनर्वसु नक्षत्र (Punarvasu Nakshatra in Hindi)

पुरुष और प्रकृति के रूप दो तारो के द्वारा यह नक्षत्र बनता है| पुनर्वसु नक्षत्र के प्रथम तिन चरण मिथुन राशी में और आखरी चरण कर्क राशी में होता है| इसके दो तारें मिथुन राशी के चिन्हों के दो बच्चो को दर्शाता है| पुनर्वसुनक्षत्र को बहुत ही शुभ नक्षत्र माना जाता है| इसका अर्थ होता है की “फिरसे प्रकशित होना”, ” फिरसे धनी होना|यह नक्षत्र चक्र का सातवाँ नक्षत्र है|

  • पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी ग्रह बृहस्पति है|
  • इस नक्षत्र के देवता भगवान आदित्य हैं।

पुष्य नक्षत्र (Pushya Nakshatra in Hindi)

तिन तारो के समूह से पुष्य नक्षत्र बना है| इन तारो की वजह से पुष्य नक्षत्र की आकृति एक तीर के जैसी बनती है| वेदों में भी इस नक्षत्र को काफी शुभ एवम मांगलिक कहा गया है| ऋग्वेद में पुष्य नक्षत्र को “तिष्य” के नाम से जाना जाता है| यह नक्षत्र पूर्ण रूप से कर्क राशी में स्थित है| यह नक्षत्र चक्र का आठवा नक्षत्र है|

  • पुष्य नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है|
  • इस नक्षत्र के देवता बृहस्पति को माना जाता है|

अश्लेषा नक्षत्र (Ashlesha Nakshatra in Hindi)

आश्लेषा नक्षत्र पांच तारों के समूह के द्वारा बना हुआ है लेकिन इसमे भी मत भेद है क्योंकि कुछ विद्वानों के द्वारा इसमे छ तारे के समूह को मानते है| इनकी आकृति चक्राकार होती है| यह नक्षत्र को वासुकी नाग का सर माना जाता है| यह पूरा नक्षत्र कर्क राशी में स्थित है|यह नक्षत्र चक्र का नौवां नक्षत्र है|

  • अश्लेषा का स्वामी ग्रह बुध है|
  • इस नक्षत्र देवता नाग हैं।

मघा नक्षत्र (Magha Nakshatra in Hindi)

यह नक्षत्र छः तारो के समूह से बने है|जिसमे मुख्य तारा का नाम मघा होने से इस समूह को मघा नक्षत्र कहा जाता है| इससे उल्टा प्रश्नवाचक चिह्न बनता है| यह सम्पूर्ण नक्षत्र सिंह राशी में स्थित है| वंश परंपरा के लिए यह नक्षत्र काफी महत्वपूर्ण है| यह नक्षत्र चक्र का दशवा नक्षत्र है|

  • मघा नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु हैं|
  • पितृ इसके स्वामी है|

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र (Purva Falguni Nakshatra in Hindi)

यह नक्षत्र भी पूर्ण रूप से सिंह राशी में स्थित है|यह नक्षत्र दो तारों के माध्यम से बना हुआ है| यह नक्षत्र चक्र का ग्यारवा नक्षत्र है| सूर्य इस नक्षत्र में 30 अगस्त के दिन प्रवेश करता है|

  • पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी ग्रह शुक्र है|
  • इस(पूर्वाफाल्गुनी) नक्षत्र के देवता “भगा” हैं।

उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र (Uttara Falguni Nakshatra in Hindi)

यह नक्षत्र दो राशी में स्थित है| इसका प्रथम चरण सिंह राशी में स्थित है तो अंतिम तिन चरण कन्या राशी में स्थित है| उतरा फाल्गुनी नक्षत्र भी दो तारों के द्वारा बना हुआ है|उ फा. और पु फा. साथ मिलकर एक चतुभुज की आकृति बनाते है| यह नक्षत्र चक्र का बारहवा नक्षत्र है|

  • उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह सूर्य है|
  • इस नक्षत्र का देवता आर्यमन हैं।

हस्त नक्षत्र (Hast Nakshatra in Hindi)

यह नक्षत्र पांच तोर के समूह से बना है| जिसमे ऊपर के चार तारे हथेली एवम निचे का पांचवा तारा तर्जनी उंगली को दर्शाता है| इस आकृति से इसे हस्त नक्षत्र कहा जाता है| यह नक्षत्र पूर्ण रूप से कन्या राशी में स्थित है| यह नक्षत्र चक्र का तेरहवा नक्षत्र है|

  • हस्त नक्षत्र का स्वामी ग्रह चंद्रमा है
  • इस नक्षत्र के अधिपति आदित्य है।

चित्रा नक्षत्र (Chitra Nakshatra in Hindi)

यह नक्षत्र चक्र के मध्यमे स्थित है इस लिए इसे संतुलन का नक्षत्र भी कहा जाता है| जिसके प्रथम दो चरण कन्या में और अंतिम दो चरण तूला राशी में स्थित है| यह एकल नक्षत्र है अर्थात यह नक्षत्र सिर्फ एक तारा से बना है जो की काफी चमकीला है|

  • चित्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल है।
  • देवता तेजस्वी का इस नक्षत्र पर शासन है।

स्वाति नक्षत्र (Swati Nakshatra in Hindi)

यह भी चित्र की तरह एकल तारा नक्षत्र है| इस तारा का रंग नारंगी रंग का है|यह भी काफी चमकीला तारा है और इस नक्षत्र के सूर्य 23 अक्टोबर में गोचर करता है|यह नक्षत्र तुला राशि में स्थित है|

  • स्वाति नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु है|
  • इस के नक्षत्र देवता पवनदेव हैं।

विशाखा नक्षत्र (Vishakha Nakshatra in Hindi)

यह नक्षत्र चार तारों के समूह से बना है जिसकी वजह से उनकी आकृति एक मेज(टेबल) की तरह दिखती है| इनके निचे के चार तारे एक तराजू की तरह की आकृति बनाते है| यह जिस राशि में इसे इसी वजह से तुला राशी भी कहते है|इसके प्रथम तिन चरण तुला और अंतिम चरण वृश्चिक राशी में है|

  • गुरु ग्रह विशाखा नक्षत्र का स्वामी है|
  • इस नक्षत्र के देवता अग्निदेव हैं।

अनुराधा नक्षत्र (Anuradha Nakshatra in Hindi)

यह नक्षत्र चार तारों से मिलकर बना है| विद्वानों के मत अनुसार इस नक्षत्र की आकृती उबले हुए चावल के ढेर के माफक है| सूर्य इस नक्षत्र में से 19 नवम्बर को गोचर करता है| यह नक्षत्र चक्रका 17वा नक्षत्र है| यह वृश्चिक राशी में स्थित है|

  • शनि ग्रह अनुराधा का स्वामी ग्रह है।
  • अनुराधा नक्षत्र देवता मित्र हैं।

जयेष्ठा नक्षत्र (Jayeshtha Nakshtra in Hindi)

जयेष्ठा नक्षत्र तिन तारो से बना है लेकिन उसका मध्य तारा प्रमुख और काफी बड़ा है| मध्य तारा बड़ा होने के कारण उसे जयेष्ठा नाम दिया गया है| इसका रंग लाल मंगल के रंग के भांति है| यह नक्षत्र सम्पूर्ण रूप से वृश्चिक राशी में है और इसके पूर्ण होते ही वृश्चिक राशी पूर्ण होकर धनु राशी शुरू होती है|

  • ज्येष्ठ नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है|
  • इस नक्षत्र के देवता इंद्र हैं।

मूल नक्षत्र (Mool Nakshtra in Hindi)

यह नक्षत्र 11 तारा के समूह से बना है| कुछ विद्वानों के द्वारा इसे सिंहपुच्छ जैसी आकृति मानी जाती है| यह नक्षत्र धनु राशी में स्थित है| यह नक्षत्र सबसे दक्षिणतम नक्षत्र है| नक्षत्र चक्र का उन्नीसवा नक्षत्र है|

  • केतु ग्रह का स्वामीत्व मूल नक्षत्र पर है।
  • मूल नक्षत्र पर नैऋति देव का शासन है।

पूर्वाषाढ़ नक्षत्र (Purvashadh Nakshtra in Hindi)

इस नक्षत्र को बनने के लिए दो तारों का समूह है| इन तारों के समूह के द्वारा गज दन्त की आकृति बनती है| 28 दिसम्बर के दिन सूर्य इस नक्षत्र से गोचर करता है| यह नक्षत्र पूर्ण रूप से धनु राशी में स्थित है|

  • शुक्र पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह है।
  • पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के देवता जल हैं।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र (Uttar-Ashadha Nakshatra in Hindi)

यह नक्षत्र चार तारों से मिलकर एक मंजुसा के भाति आकृति बनाता है| इस नक्षत्र का प्रथम चरण धनु राशि में होता है और बाकी के तिन नक्षत्र चरण मकर राशि में स्थित होता है| सूर्य इस नक्षत्र में 10 जनुअरी में गोचर करते है| यह नक्षत्र चक्र का 21वा नक्षत्र है|

  • सूर्य ग्रह का स्वामीत्व उत्तराषाढ़ा नक्षत्र पर है।
  • इस नक्षत्र के देवता दस-विश्वदेवा माने जाते है|

श्रवण नक्षत्र (Shravan Nakshatra in Hindi)

श्रवण नक्षत्र तिन तारो के समूह से बनता तारा है| श्रवण नक्षत्र के तिन तारो से त्रिकांड की आकृति बनती है| यह तिन तारों को भगवान् वामन के तिन पद के रूप में माना जाता है| यह सम्पूर्ण नक्षत्र मकर राशि में स्थित है| श्रवण मॉस की पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा श्रवण नक्षत्र में से गोचर करता है|

  • चंद्रमा ग्रह श्रवण नक्षत्र राशि का स्वामी है|
  • श्रवण नक्षत्र के देवता भगवान विष्णु माने जाते है|

धनिष्ठा नक्षत्र (Dhanishta Nakshatra in Hindi)

यह नक्षत्र पांच तारो के समूह से बने है| कुछ लोगो के द्वारा इसमे छः तारे होने की बात कही जाती है| इस सभी तारों की स्थिति कुछ इस तरह से है की आकृति पतंग या हीरे के सामान दिखती है| इस नक्षत्र के प्रथम दो चरण मकर राशि में होते है और अंतिम दो चरण कुम्भ राशी में स्थित होते है|

  • धनिष्ठा नक्षत्र पर मंगल ग्रह का स्वामित्व है|
  • अष्ट-वसु इस नक्षत्र के देवता माने जाते है|

शतभिषा नक्षत्र (Shatbhisha Nakshtra in Hindi)

नाम पर से ही पता लगाया जा सकता है की इस नक्षत्र में सौ तारे होगे| हालांकि इसमे भी कुछ विद्वानों के द्वारा मतभेद है| कुछ विद्वान् के द्वारा और तैतरीय संहिता में भी इसे एकल तारा के रूप में माना जाता है| यह नक्षत्र पूर्ण रूप से कुम्भ राशी में स्थित है|

  • राहु ग्रह को शतभिषा नक्षत्र पर स्वामित्व प्राप्त है|
  • वरूणदेव इस नक्षत्र के स्वामी देवता माने जाते हैं।

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र (Purva Bhadrapad Nakshatra in Hindi)

दो तारो के द्वारा इस नक्षत्र बना हुआ है| एक ही खड़ी रेखा में दोनों तारे स्थित है| इस नक्षत्र के प्रथम तिन चरण कुम्भ राशी में और अंतिम चरण मीन राशी में स्थित है| भाद्रपद मॉस की पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा इस नक्षत्र में स्थित होता है|

  • बृहस्पति ग्रह का स्वामीत्व पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र पर है|
  • इस नक्षत्र के देवता अजैकपाद माने गए हैं।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र (Uttara Bhadrapada Nakshatra in Hindi)

पूर्व भाद्रपदा नक्षत्र की तरह ही उत्तराभाद्रपदा नक्षत्र में भी दो तारों का समूह है| यह दोनों तारे एक ही खड़ी लाइन में स्थित है| पूर्व भाद्रपदा के दो तारे और उत्तराभाद्रपदा नक्षत्र के दो तारे एक साथ मिलकर एक चोकी बनाते है| यह नक्षत्र पूर्ण रूप से मीन राशी में स्थित है|

  • शनि ग्रह द्वारा उत्तराभाद्रपद नक्षत्र पर स्वामित्व प्राप्त है|
  • अहिर्बुध्नय देवता का इस नक्षत्र पर शासन है।

रेवती नक्षत्र (Revati Nakshatra in Hindi)

रेवती नक्षत्र कुल 32 तारो को मिलकर बना हुआ है| in सभी तारो से मिल कर रेवती नक्षत्र की आकृति मृदंग की बनती है| यह नक्षत्र चक्र का आखरी नक्षत्र है| यह पूर्ण रूप से मीन राशि में आता है जो की एक मूल संज्ञक नक्षत्र है|बसंत सम्पात के लिए इसे काफी महत्वपूर्ण माना जाता है|

  • रेवती नक्षत्र का स्वामी बुध है|
  • इस नक्षत्र के भगवान पूषा माने जाते हैं।

Nakshatra, Ruler, Donate, and Herb/Tree

नक्षत्र के स्वामी ग्रह कोनसे है, उसके स्वामी देवता कोन है, उन नक्षत्र के लिए कौन सी चीजों का दान करना चाहिए और किस जडीबुटी या पेड़ उस नक्षत्र से देखा जा सकता है उन सभी के लिए निचे दिया गया टेबल आपकी अच्छी मदद करेगा|

NakshatraPlanet Ruler GodDonateHerb/Tree
अश्विनीकेतु अश्विनीकुमारदवाये अडूसा
भरणीशुक्र यम सफ़ेद और लाल रंग की वस्तुओंआमला
कृतिकासूर्य अग्नि देव गोल्ड, ब्राउन वस्तुओंअंजीर
रोहिणीचन्द्र ब्रह्मा मिल्क, सफ़ेद वस्तुओंजामुन
मृगशिरामंगलचन्द्र सफ़ेद और लाल रंग की वस्तुओंकाथा
आर्द्राराहूशिव हरी वस्तुओं अथवा लाल चन्दन बहेड़ा, लाल चन्दन
पुनर्वसुबृहस्पतिअदिति हरी और पिली वस्तुबाम्बू
पुष्यशनिबृहस्पतिसफ़ेद और काली वस्तुओंपीपल
अश्लेषाबुध नाग के देवता तिल, गौ, हरी वस्तुनाग चम्पा
मघाकेतु पितृ नमक, गुड बरगद
पूर्वाफाल्गुनीशुक्र भगा(भाग्य के देवता)ब्राउन लक्ज़री आइटम पलाश
उत्तराफाल्गुनीसूर्य अर्यमान ब्राउन गाय को भोजन कराये रुद्राक्ष
हस्तचन्द्र सूर्य हरी और सफ़ेद वस्तु का दान जुई
चित्रामंगल विश्वकर्मा लाल और हरी वस्तुओं का दान बिल्व
स्वातिराहूपवन देवकाले तिल, चीनी अर्जुनट्री
विशाखाबृहस्पतिअग्नि देव पिली एवम सफ़ेद वुड एप्पल
अनुराधाशनि मित्र सिन्दूर, तेल, कमल का फुल नाग केसर
ज्येष्ठबुध इंद्र किन्नर को दान दे बकुल ट्री
मूल / मूलाकेतु नैऋति देव (God of Dissolution)Sandal, Guggal साल ट्री
पूर्वाषाढ़ाशुक्र जल कॉस्मेटिक गिलोई
उत्तराषाढ़ासूर्य विश्वदेव भेंसकटहल का पेड़
श्रवणचन्द्र विष्णु काली एवम सफ़ेद वस्तु आक
धनिष्ठामंगल वसु (God of Light) लाल एवम काली वस्तुकीकर, शामी
शतभिषाराहू वरुण काली वस्तु कदम्ब
पूर्वाभाद्रपदबृहस्पतिअजैकपाद काली एवम पिली वस्तुओंआम का पेड़
उत्तराभाद्रपदशनि अहिर्बुध्नयकाली एवम पिली वस्तुओंनीम
रेवतीबुध पूषा(पोषक – Nourisher)हरी एवम काली वस्तुमहुआ

आज के इस लेख में नक्षत्र क्या है, कितने नक्षत्र है और उनके बारे में अच्छे विवरण के साथ इनफार्मेशन हमने देखि| आगे के लेखो में हम आपको नक्षत्र के सन्दर्भ में सभी चीजो के साथ उसे कैसे उपाय कर सकते है और भविष्य कथन में कैसे उपयोगी होता है वह देखेंगे| बहोत जल्द ही हम आपको सभी नक्षत्र के लिए उसमे जन्म लेने वाले व्यक्ति का भविष्य कैसा रहेगा वह भी लेख के माध्यम से दर्शाएंगे|

अगर आपको हमारा यह लेख nakshatra in Hindi पसंद आया है या इस विषय में आपके कोई सुझाव या प्रश्न है तो हमें जरूर से बताये हम आपको सही समाधान देने का अवश्य प्रयास करेंगे|

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