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Exalted and Debilitated planets in Vedic Astrology | उच्च और नीच

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Exalted and Debilitated planets in Vedic Astrology

ज्योतिष शास्त्र में ग्रह की स्थिति एवम बल का काफी महत्व है| ऐसे में जब भी कोई ग्रह जन्म पत्रिका में उच्च का या नीच का(Exalted and Debilitated) हो जाता है तो उस ग्रह का महत्व काफी बढ़ जाता है| आज के इस लेख के माध्यम से हम आपको जन्म पत्रिका में कोनसा ग्रह कब नीच का और उच्च का होता है उसे विस्तार से समजायेंगे|

सबसे पहले उच्च का ग्रह और नीच का ग्रह क्या होता है उसे समजते है|

उच्च और नीच का ग्रह क्या है?(what is Exalted and Debilitated planets in Vedic Astrology)

जन्म पत्रिका में कोई भी ग्रह कोई ऐसी राशि में बेथ जाता है जो उसे अत्यधिक शक्तिशाली बना दे या उसे अत्याधिक कमजोर बना ये उस स्थिति में ग्रह उच्च का या नीच का होता है| हमारे ऋषि और शास्त्रों के द्वारा हर ग्रह के लिए उसकी उच्च की और नीच की राशि कही गयी है| उस राशि में जाकर ग्रह विशेष शक्ति को प्राप्त करता है या अपनी शक्ति को खोता है जिसे जीवन पर अधिक प्रभाव पड़ता है|

अब हम समजते है की हज्न्म पत्रिका में ग्रह किस राशि में उच्च का और नीच का होता है|

ग्रह किस राशि में उच्च का और नीच का होता है(In which sign the planet is Exalted and Debilitated)

यहाँ पर निचे टेबल दिया है जिसमे हमने ग्रह की राशि में उच्च और नीच का होता है उस सन्दर्भ में विस्तृत में जानकारी प्रदान की है|

planet उच्च राशि (Exalted sign)नीच राशि (Debilitated)
सूर्य (sun)मेष (Aries)तुला (Libra)
चन्द्र (moon)वृषभ (Taurus)वृश्चिक (Scorpio)
मंगल (mars)मकर (Capricorn)कर्क (Cancer)
बुध (Mercury)कन्या (Virgo)मीन (Pisces)
गुरु (Jupiter)कर्क (Cancer)मकर (Capricorn)
शुक्र (Venus)मीन (Pisces)कन्या (Virgo)
शनि (Saturn)तुला (Libra)मेष (Aries)
राहू (Rahu)वृषभ (Taurus)वृश्चिक (Scorpio)
केतु (Ketu)वृश्चिक (Scorpio)वृषभ (Taurus)

कितनी डिग्री तक ग्रह उच्च का होता है?

एक राशि 30 डिग्री की होती है लेकिन उसमे भी ग्रह को एक विशेष डिग्री तक विशेष उच्च और विशेष निच स्थिति प्राप्त होती है| यहाँ पर हम आपसे सभी ग्रह किस किस राशि में कितनी डिग्री के बिच काफी उच्च और नीच का होता है यह शेयर कर रहे है|

सूर्य की उच्च और नीच की स्थिति (Sun’s Exalted and Debilitated Sign and Degree)

सूर्य की अपनी राशि सिंह राशि है| लेकिन सूर्य जब भी मेष राशि में पहोचता है तब उच्च का माना जाता है| जब की सूर्य को तुला राशि में नीच का माना जाता है| सिंह राशि उसकी मूलत्रिकोण राशि भी मानी जाती है|

  • 10 डिग्री पर सूर्य मेष में उच्च का माना जाता है|
  • 10 डिग्री पर सूर्य तुला राशि में नीच का माना जाता है|
  • 1 से 10 डिग्री तक सिंह राशि में मूल त्रिकोण राशि में होता है|

चन्द्र की उच्च और नीच की स्थिति (Moon’s Exalted and Debilitated Sign and Degree)

चन्द्र को कर्क राशि का स्वामी कहा गया है| लेकिन उसकी उच्च की राशि वृषभ है| जब की उसकी नीच की राशि वृश्चिक राशि है| वृषभ राशि उसकी मूलत्रिकोण राशि भी है|

  • 3 डिग्री पर वृषभ राशि में चन्द्र को उच्च का माना गया है|
  • 3 डिग्री पर वृश्चिक राशि में चन्द्र को नीच का माना गया है|
  • 4 डिग्री से लेकर 30 डिग्री तक वृषभ में वह मूलत्रिकोण राशि में है|

मंगल की उच्च और नीच की स्थिति (Mars Exalted and Debilitated Sign and Degree)

मंगल के पास अपनी दो राशि है मेष राशि और वृश्चिक राशि| लेकिन वह शनि की राशि मकर में उच्च का होता है| मंगल के लिए मेष ही मूलत्रिकोण राशि है| मंगल कर्क राशि में ही नीच का होता है|

  • 28 डिग्री पर मंगल वृश्चिक राशि में उच्च का माना जाता है|
  • 28 डिग्री कर्क राशि में मंगल नीच का माना जाता है|
  • 0 से 18 डिग्री में मेष राशि में मंगल मूल त्रिकोण राशि में होता है|

बुध की उच्च और नीच की स्थिति (Mercury’s Exalted and Debilitated Sign and Degree)

बुध के पास दो राशि है मिथुन और कन्या राशि जिसका वो स्वामी है| बुध कन्या राशि में उच्च का होता है| और मीन राशि में बुध नीच राशि का माना जाता है| बुध कन्या में ही मूल त्रिकोण राशिस्थ होता है|

  • 15 डिग्री कन्या में बुध उच्च का होता है|
  • 15 डिग्री मीन में बुध नीच का होता है|
  • 16 से 20 के बिच बुध मूलत्रिकोण राशिस्थ होता है|

गुरु की उच्च और नीच की स्थिति (Jupiter Exalted and Debilitated Sign and Degree)

गुरु के पार स्वयं की दो राशि है धनु और मीन| लेकिन गुरु चन्द्र की राशि कर्क में उच्च का होता है| और वह मकर जो की शनि की राशि है वहा पर नीच का होता है|धनु राशि गुरु की मूल त्रिकोण राशि भी है|

  • 5 डिग्री पर गुरु कर्क राशि में उच्च का होता है|
  • 5 डिग्री पर मकर राशि में गुरु नीच का होता है|
  • 0 से 13 डिग्री पर गुरु धनु राशि में मूल त्रिकोण राशिस्थ होता है|

शुक्र की उच्च और नीच की स्थिति (Venus Exalted and Debilitated Sign and Degree)

शुक्र के पास भी अपनी दो राशि है वृषभ और तुला जिसका वह स्वामी है| लेकिन वह गुरु की राशि मीन में उच्च का होता है| जब की वह बुध की राशि मीन में नीच का होता है| तुला उसकी मूल त्रिकोण राशि है|

  • 27 डिग्री पर शुक्र मीन में उच्च का
  • 27 डिग्री पर कन्या राशि शुक्र नीच का
  • 0 से 10 डिग्री तक तुला राशि में शुक्र मूल त्रिकोण राशिस्थ

शनि की उच्च और नीच की स्थिति (Saturn Exalted and Debilitated Sign and Degree)

शनि की अपनी दो राशि है मकर और कुम्भ राशि जिसका वो स्वामी ग्रह है| शनि शुक्र की राशि तूला में उच्च का होता है| जब की वह मंगल की राशि मेष में नीच का होता है|

  • 20 डिग्री पर तुला राशि में शनि उच्च का
  • 20 डिग्री मेष राशि पर शनि नीच का
  • 0 से 20 डिग्री पर शनि कुम्भ राशि मूल त्रिकोण राशिस्थ

राहू और केतु (Rahu and Ketu Exalted and Debilitated Sign )

  • राहू की उच्च राशि वृषभ है जब की उसे कुम्भ राशि का स्वामी कहा गया है| मिथुन उसकी मूल त्रिकोण राशि है|
  • केतु वृश्चिक राशि में उच्च का माना गया है | वह वृषभ राशि में नीच का माना गया है| धनु राशि उसकी मूल त्रिकोण राशि है|
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