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Astrology

ज्योतिष के अनुसार कौनसा व्यवसाय करना चाहिए जानिए HINDI में

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आज के समय में कोनसा व्यवसाय करना चाहिए या नौकरी करनी चाहिए यह पहले से तय करना चाहिए| ज्योतिष शास्त्र हमारी कौनसा व्यवसाय करना चाहिए उस विषय में निर्णय लेने में मदद कर सकता है| योग्य व्यवसाय की या नौकरी की पसंदगी करनी काफी जरूरी है जिसे आने वाले समय में बड़े नुकशान से बचा जा सकता है| ज्योतिष में ऐसे कई सारे नियम है जिसे हम यह जान सकते है की हमें कोनसा व्यवसाय करना चाहिए जिसे अधिक लाभ और सफलता प्राप्त हो|

अभी के समय के हजारो प्रकार के व्यवसाय है| सभी व्यवसाय को स्पष्ट रूप से वर्गीकृत करना काफी मुश्किल है| फिर भी हमने हमारी बौधिक क्षमता के अनुसार कुछ इस प्रकार वर्गीकृत किया है जिसे हम ज्योतिष में व्यवसाय निर्णय में आने वाली तकलीफों को दूर कर सके| किसी भी व्यक्ति के व्यवसाय को पांच भागो में विभाजित किया जा सकता है|

व्यवसाय के प्रकार

  • राजकीय क्षेत्र
  • बौधिक क्षेत्र
  • तांत्रिक(औधोगिक क्षेत्र)
  • कला क्षेत्र
  • श्रम आधारित क्षेत्र

राजनीती और ज्योतिष

राजकीय क्षेत्र के अधिकतर व्यवसाय सूर्य, गुरु और शनि के साथ जुड़े हुए है| राजकीय क्षेत्र के व्यवसाय में सफलता प्राप्त कराने के लिए इन तीनो ग्रह की स्थिति मजबूत होनी आवश्यक है| इस क्षेत्र में मंत्री, नगरपति, सरपंच, MLA, MP, कॉर्पोरटर, जैसे पद आते है| जन्म पत्रिका से ये आसानी से देखा जा सकता है की जातक को इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी की नहीं|

बौधिक क्षेत्र के व्यवसाय और ज्योतिष

बौधिक क्षेत्र: बौधिक क्षेत्र के व्यवसाय के लिए ज्योतिष(Astrology) में बुध ग्रह और गुरु, राहू को निर्देशित किया गया है| जन्म पत्रिका में बुध ग्रह की अच्छी स्थिति इस क्षेत्र के व्यवसाय की और इशारा करती है| बौधिक क्षेत्र के व्यवसाय में चिंतन और तर्कशक्ति की आवश्यकता होती है| ज्योतिषी, शिक्षक, धर्म गुरु, वकील, डॉक्टर, न्यायधीश, वैज्ञानिक, पत्रकार, विवेचक, गणितज्ञ, व्याकरणशास्त्री, खगोलशास्त्र, तत्वज्ञान, मानसशास्त्री जैसे व्यवसाय आते है|

औधोगिक क्षेत्र के व्यवसाय और ज्योतिष

तांत्रिक(औधोगिक क्षेत्र): व्यक्ति के बल के साथ कार्य शक्ति, और तांत्रिक सूज-बुज की भी जिसमे जरूरत हो इस तरह के व्यवसाय इस में आते है| टेक्निकल, मैकेनिक्स, केमिस्ट, engineer, सर्जन, उत्पादक, जैसे व्यवसाय तांत्रिक(औधोगिक क्षेत्र) में आते है| ज्योतिष शास्त्र में तांत्रिक(औधोगिक क्षेत्र) व्यवसाय को देखने के लिए मंगल के साथ गुरु और बुध को देखने के आवश्यकता है| मंगल प्रभावी व्यक्ति इसमे अधिक सफलता प्राप्त कर सकता है|

कला क्षेत्र के व्यवसाय और ज्योतिष

कला क्षेत्र: इस प्रकार के क्षेत्र में व्यक्ति की आंतरिक भावनाओं को व्यक्त करना होता है| इसमे सर्जन शक्ति, भावनाओं, और संवेदन शक्ति काफी महत्व पूर्ण है| ज्योतिष शास्त्र में कला क्षेत्र के व्यवसाय के लिए शुक्र काफी महत्व पूर्ण है| जन्म पत्रिका में शुक्र की स्थिति मजबूत होने पर कलाकार, संगीतकार, लेखक, कवी, एक्टर, पेंटर, शिल्पकला, फोटोग्राफी जैसे व्यवसाय में अच्छी सफलता मिलती है| इन व्यवसाय के लिए चंद्रमा(Moon) और राहू(Rahu) को भी देखना आवश्यक है|

श्रम आधारित कार्य और ज्योतिष शास्त्र

श्रम आधारित व्यवसाय: ज्योतिष शास्त्र में इस तरह के व्यवसाय के लिए शनि को प्रधान माना जाता है| जन्म पत्रिका में ग्रहों की अच्छी स्थिति और दशा न आने पर भी इस तरह के कार्य से जुड़ना पड सकता है| कभी कभी पिता का व्यवसाय उस तरह का होने उस व्यवसाय से जुड़ने से भी श्रम आधारित कार्य करना पड सकता है|

ज्योतिष के मदद से व्यवसाय के चयन करने के नियम

व्यवसाय के विभाजन के बाद अब हम ज्योतिष शास्त्र की मदद से व्यवसाय का चयन किस तरह से किया जाता है उसे समजते है|ज्योतिष की मदद से व्यवसाय का चयन करना काफी आसान है, लेकिन उसके लिए थोड़े नियम का ज्ञान होना आवश्यक है| ज्योतिष की मदद से व्यवसाय के चयन कराने के लिए निचे दिए गए फैक्टर को ध्यान में लेना चाहिए|

  • लग्नभाव और उसका स्वामी(Ascendant and Ascendant lord)
  • दुसराभाव (Second house)
  • चन्द्र की स्थिति(Position of Moon)
  • सूर्य(Position of the sun)
  • बुध (Mercury)
  • सप्तम भाव (Seventh House and its Lord)
  • दशम भाव (Tenth House and Its Lord)

ऊपर दिए गए सभी फैक्टर को अच्छे से एनालिसिस करन चाहिए| लग्न भाव की स्थिति क्या है, उसके स्वामी की स्थिति क्या है उनमे कितना बल है वह सभी देखना चाहिए| इसी तरह चन्द्र की स्थिति, सूर्य की स्थिति और बुध की स्थिति को भी देखना चाहिए| सप्तम भाव व्यवसाय का भाव है और दशम भाव भी व्यवसाय और प्रोफेशन का भाव है| व्यवसाय के निर्णय पर आने से पहले सप्तम और दशम भाव और उनके स्वामी की स्थिति को जानना चाहिए|

ऊपर सभी दिए गए भाव के बल इत्यादि को जान कर इसमे से कोन अति प्रभावी है यह भी देखना चाहिए | ये सभी देखने के बाद जन्मपत्रिका में बन रहे राजयोग को भी जानना चाहिए| इस तरह सभी प्रकार के फैक्टर को जानने के बाद कोनसा व्यवसाय करना सही रहेगा इस निर्णय पर आना चाहिए|

नियम जानने के बाद दशम भाव में कोनसी राशि के द्वारा किस व्यवसाय को निर्देशित किया जाता है उसे पढ़े|

ज्योतिष में दशम भाव में स्थित राशि के आधार पर व्यवसाय का निर्णय

मेष राशि दशम भाव में होने पर: कृषि, बाग़ बगीचा, खान-खनिज(खदानों), भूमि, सेना, पुलिस, सर्जरी, वनस्पति, औषधीय, रसायनशास्त्र, एरोनोटिक जैसे व्यवसाय

वृषभ राशि दशम भाव में स्थित होने पर: वाहन, पाशुपालन, डेरी, पशुचिकित्सक, सिनेमा, कला क्षेत्र, मनोरंजन क्षेत्र, राजकीय क्षेत्र, सौंदर्यप्रसाधनों के क्षेत्र के व्यवसाय

मिथुन राशि दशम भाव में स्थित होने पर: दशम भाव में मिथुन इ बौधिक व्यवसाय को सूचित करती है| विचारक, चिंतकों, तत्वज्ञानी, ज्योतिषी, गणितज्ञ, बैंक मेनेजर, अकाउंटेंट, पत्रकार, अमलदार, अंकशास्त्री, कानून, तर्कशास्त्र, इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट का व्यवसाय, हिरा-जवेरात, खगोलशास्त्र, क्लर्क जैसे व्यवसाय किये जा सकते|

कर्क राशि दशम भाव में स्थित होने पर: लग्न से दशम भाव में कर्क राशि स्थित होने पर व्यवसाय में जल तत्व होने की संभावना अधिक होती है| दवाओं, दरियाई वाहन-व्यवहार, फलोद्यान, रंग-रसायन, शस्त्र और मशीन अलग अलग हिस्से उत्पादन जैसे व्यवसाय किए जा सकते है|

सिंह राशि दशम भाव में स्थति होने पर: लग्न से दशम भाव में सिंह राशि होने पर सरकारी कार्य क्षेत्र में उच्च पद, मंत्री, बैंक मेनेजर, जैसे बड़े पद को प्राप कर सकते है| कीमती स्टोन के व्यवसाय और जहा पर लीडरशिप लेने की जरूरत हो ऐसे व्यवसाय किये जा सकते है|

कन्या राशि दशम भाव में: जन्म पत्रिका में जब भी कन्या राशि दशम भाव में स्थित हो तब हर प्रकार के वाहन व्यवहार से जुड़ा व्यवसाय, लेखन कला से जुड़ा व्यवसाय, ललितकला, कविता सर्जन, पत्र्कारित्व, और संचालनालय में कार्य कर सकते है|

तुला राशि दशम भाव में: ज्योतिष में जब भी तुला राशि दशम भाव में स्थित हो तब न्याय क्षेत्र से जुडा व्यवसाय, अहम्स होता है| सञ्चालन कार्य से जुड़ा व्यवसाय, कला संगीत क्षेत्र से जुड़ा व्यवसाय और कार्य, वकील, मैजिस्ट्रेट, जैसे कार्य से भी जुड़ सकते है|

वृश्चिक राशि दशम भाव में स्थित: रासायनिक उद्योग, रंग उद्योग, कुत्रिम रासायनिक औषधि, खनीज तेल, पेट्रो केमिकल, वैदिक विज्ञान, रहस्य शोधक, और विवेचन कार्य जन्म पत्रिका में वृश्चिक राशि दशम भाव में होने पर स्थित पर कर सकते है|

धनु राशि दशम भाव में स्थित: ज्योतिष में व्यवसाय की पसंदगी में जब भी जन्म पत्रिका में दशम भाव में धनु राशि स्थित हो तब जातक न्याय, ज्ञान, विज्ञानं, धर्मक्षेत्र, वहीवट कार्य, बौधिक कार्य, शिक्षक, तत्वचिंतन, खेलकूद, विद्युत और अदनी से जुड़े कार्य कर सकता है|

मकर राशि दशम भाव में: मकर राशि कालपुरुष की जन्म पत्रिका में दशम भाव में ही स्थित होते है| जब भी जन्म पत्रिका में दशम भाव में मकर राशि स्थित होती हो तब धातु उद्योग,जलीय पदार्थ, और चीज वास्तु का व्यापर, डॉक्टर, और राजकीय क्षेत्र में जातक जा सकता है|

कुंभ राशि दशम भावमें: जब भी पत्रिका में कुम्भ राशि दशम भाव में स्थित हो तब जातक विद्युत और इलेक्ट्रिक के कार्य में अच्छा कर सकता है| इसके अलावा खदान, इंजिनियरिंग, शस्त्रों, अग्नि-धातु क्षेत्र, भूस्तर विद्या, खोद ने का कार्य, खेती, और शारीरिक क्षमता की जरूरत हो ऐसे कार्य भी जातक कर सकता है|

मीन राशि दशम भाव में: दशम भाव में मीन राशि स्थित होने पर जातक अधिकतर किस्सों में सञ्चालन कार्य से जुड़ा हुआ होता है| इसके अलावा व्यवस्थापक और बौधिक क्षेत्रो के कार्य में भी जातक अच्छा कर सकता है|

दशम भाव में स्थित ग्रह, दशम भाव का स्वामी ग्रह और आत्माकारक ग्रह से व्यवसाय निर्णय

जन्म पत्रिक में व्यवसाय के निर्णय के लिए ग्रह का विश्लेषण काफी आवश्यक है| जैसे हमने देखा की दशम भाव का महत्व व्यवसाय निर्णय में काफी महत्व पूर्ण है| दशम भाव में स्थित राशी से अभीतक हमने कैसे व्यवसाय का चयन किया जा सकता है वह देखा| अब हम ज्योतिष में दशम भाव में स्थित ग्रह, दशम भाव का स्वामी ग्रह या आत्मा कारक कोई ग्रह बनता हो तब कौनसा व्यवसाय किया जा सकता है वह देखते है|

“आत्माकारक ग्रह यानी की जन्म पत्रिका में सबदे अधिक डिग्रीधारी ग्रह”

जन्म पत्रिक में सूर्य के द्वारा सूचित व्यवसाय: दवाओं, औषध, खातर उद्योग, सुवर्ण का व्यवसाय, उच्च सरकारी नौकरी, सरकार में उच्च का पद, किसी भी संस्था में बड़ा पद, घास का व्यपार, उन का व्यवसाय, दलाली जैसे व्यवसाय सूर्य दर्शाता है|

जन्म पत्रिक में चन्द्र के द्वारा सूचित व्यवसाय: कृषि, वाहन व्यवहार, सेल्समेन, घी, दूध की बनावट, जलीय पदार्थ, मोती का व्यापार, टेक्सटाइल का व्यवसाय, औक्सिलरी, नौकाक्षेत्र, मनो विज्ञान, न्याय, समुद्र में से प्राप्त होने वाली वस्तुओं का व्यवसाय, मदिरा, ट्रांसपोर्ट, फिल्म प्रदर्शन, कविता और कल्पना शक्ति का जिसमे उपयोग हो ऐसे व्यवसाय चंद्रमा जब दशम भाव में हो तब करना चाहिए|

जन्म पत्रिक में मंगल के द्वारा सूचित व्यवसाय: फ़ौज क्षेत्र में, लश्करी, पुलिसकर्मी, खेल कूद, खनिज क्षेत्र, सिरामिक्स, भूस्तर विद्या, बिजली के साधन की बनावट और व्यापार, सर्जरी, रेलवे, इंजीनियर, शस्त्र विद्या, अग्नि और धातु के साथ जुड़ा हुआ कार्य मंगल के द्वारा सूचित किया जाता है|

जन्म पत्रिक में बुध के द्वारा सूचित व्यवसाय: बौधिक कार्य, कारकूनी कार्य, गणितशास्त्र, साहित्यिक प्रवृति, स्टोरी राइटर, हास्य कलाकार, दिग्दर्शक, ज्योतिष, खगोलवेत्ता, ऑडिट, चार्टेड अकाउंटेंट, स्पीकर, कर्मकाण्ड, प्रकाशन इत्यादि कार्य को बुधके द्वारा देखा जाता है|

जन्म पत्रिक में गुर के द्वारा सूचित व्यवसाय: स्वतंत्र व्यवसाय, वकील, न्यायालय, कवी, धार्मिक संस्था के प्रमुख, साधू, कीमती धातु का व्यापार, रेवन्यू खाता, ट्रेजरी, बैंकिंग, शिक्षण, इत्यादि कार्य गुरु के अंतर्गत आते है|

जन्म पत्रिक में शुक्र के द्वारा सूचित व्यवसाय: सुवर्ण-चांदी, हिरा और कीमती जवेरात, नाट्य, नृत्य, संगीत, शृंगार, सुगन्धित द्रव्य, कस्टम, आयात निकास, फोटोग्राफी, स्त्री आधारित व्यवसाय, आनंद प्रमोद की चीज वस्तु का व्यापार, इत्यादि गुरु के अंतर्गत आते है|

जन्म पत्रिक में शनि के द्वारा सूचित व्यवसाय: राजकीय क्षेत्र, मेजिस्ट्रेट, तत्वज्ञान, नगरपति, लोकनेता, शारीरिक कार्य, मजदुरी, लोहा इत्यादि का व्यवसाय, कोयले सम्बंधित व्यवसाय, सुतार, लुहार, जैसे कार्य, शनि के अधिपत्य में आते है|

जन्म पत्रिक में राहू/केतु के द्वारा सूचित व्यवसाय: जहर और जहरीली दवाये, वनस्पति से जुड़े कार्य, जादूगर, तांत्रिक विद्या, समोहन विद्या, जासूसी, हैसे गुप्त कार्य जन्म पत्रिका में राहू के द्वारा सूचित होते है|

व्यवसाय का चयन कराने के लिए कारकांश पत्रिका

जन्म पत्रिका का चयनं कराने के लिए कारकांश पत्रिका का विश्लेषण करना काफी आवश्यक है| कारकांश कुंडली आत्माकारक ग्रह से बनती है| इस कुंडली बनाने के बाद कोनसा ग्रह सबसे अधिक शक्ति शाली है, कारकांश में दशम भाव में कोनसा ग्रह है इन सभी स्थिति का अच्छे से एनालिसिस कराने के बाद व्यवसाय का चयन करना चाहिए|

आशा है की आपको व्यवसाय की पसंदगी ज्योतिष के माध्यम से कैसे की जाती है उस विषय में अच्छे से समज में आया होगा| अगर आपको इस विषय में कोई भी प्रश्न है तो हमें कमेंट कर सकते है हम आपको अवश्य संतोष कारक जवाब देने का प्रयत्न करेंगे|

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